सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ को सरकार से NOC मिल गई है। अब फिल्म को CBFC की मंजूरी का इंतजार है। भारत-चीन के बीच 2020 में हुए टकराव पर बनी इस फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी देश के सम्मान को ठेस न पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय (IB Ministry) को मेकर्स के दिए ‘मातृभूमि’ के नए वर्जन से कोई आपत्ति नहीं है।इसके बाद इस वॉर-ड्रामा फिल्म को NOC दे दी गई है। NOC मिलने के बाद फिल्म इस साल के आखिर में सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है। फिल्म की आधिकारिक रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, सलमान खान और उनकी टीम इसे 13 नवंबर को रिलीज करने पर विचार कर रही है। उनका मानना है कि दिवाली के बाद का फेस्टिव माहौल फिल्म की रिलीज के लिए सही रहेगा। फिल्म की सेंसर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मेकर्स जल्द ही फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास जमा करेंगे। अगर CBFC से मंजूरी मिल जाती है और यह प्रक्रिया इसी महीने पूरी हो जाती है, तो सलमान और उनकी टीम फिल्म को 13 नवंबर को रिलीज कर सकती है। NOC के बाद CBFC सर्टिफिकेट जरूरी NOC और CBFC की मंजूरी अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। मंत्रालय से NOC मिलने के बाद फिल्म CBFC के पास भेजी जाती है। CBFC से सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 दिनों में फिल्म की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। ओरिजिनल वर्जन में किए गए बदलाव फिल्म जिस घटना पर आधारित है, वह चीन से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच घटी थी, हालांकि अब चीन के साथ सुधरे रिश्तों को देखते हुए सरकार ने फिल्म के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने मेकर्स को उनमें बदलाव करने का सुझाव दिया। इसके बाद ‘मातृभूमि’ को ओरिजिनल वर्जन की तुलना में काफी बदला गया है। अब फिल्म में भारत और चीन के रिश्तों को सकारात्मक नजरिए से दिखाया जाएगा। डीटेल में जानिए क्यों बार-बार टल रही मातृभूमि, क्या है पूरा विवाद? फिल्म मातृभूमि लंबे समय से विवादों में है। फिल्म 2020 में हुई गलवान झड़प पर बनी है। पहले इसका टाइटल ही बैटल ऑफ गलवान रखा गया था। ‘बैटल ऑफ गलवान’ का ट्रेलर 27 दिसंबर को सलमान खान के जन्मदिन के मौके पर रिलीज हुआ था। ट्रेलर सामने आने के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सलमान खान की ड्रेस और हेयर स्टाइल को लेकर भी आलोचना हुई थी। चीनी एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बॉलीवुड फिल्में मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन वे इतिहास को बदल नहीं सकतीं। चीनी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग झोंगपिंग के हवाले से लिखा था कि भारत में फिल्मों का इस्तेमाल देशभक्ति की भावना को बढ़ाने के लिए किया जाता है। हालांकि, उनके मुताबिक कोई भी फिल्म गलवान झड़प से जुड़े तथ्यों को नहीं बदल सकती। सॉन्ग ने दावा किया था कि पहले भारतीय सैनिकों ने सीमा पार की थी और इसके जवाब में चीनी सैनिकों ने चीनी सीमा की रक्षा की थी। आलोचना के बाद मेकर्स ने फिल्म के कुछ हिस्सों को दोबारा शूट करने का फैसला किया। करीब 40 दिनों तक री-शूट किया गया, ताकि कहानी के कुछ हिस्सों में बदलाव कर उसे ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके। इसी वजह से फिल्म की तय रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई।आपत्ति उठाए जाने पर टाइटल बदलकर मातृभूमिः मे वॉर रेस्ट इन पीस कर दिया गया है। फिल्म के नाम और रिलीज में बदलाव को गलवान संघर्ष से जुड़े संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे से भी जोड़कर देखा गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म ‘मातृभूमि’ को सर्टिफिकेट देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। प्रोडक्शन हाउस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि फिल्म की सीबीएफसी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी होने की खबरें पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। सर्टिफिकेट से जुड़े दावों के बीच सलमान खान फिल्म्स ने बयान जारी कर कहा कि फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजा ही नहीं गया। इसलिए इस तरह की रिपोर्ट्स पर भरोसा न करें। सलमान खान फिल्म्स ने मीडिया और लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि की जानकारी न फैलाएं। फिल्म से जुड़े सभी आधिकारिक अपडेट केवल उनके ऑफिशियल प्लेटफॉर्म पर ही शेयर किए जाएंगे। फिल्म में सलमान खान मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके अलावा ‘मातृभूमि’ में चित्रांगदा सिंह, अंकुर भाटिया, अभिलाष चौधरी और जेन शॉ समेत कई कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। सीबीएफसी कैसे काम करता है? सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड के पास फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए अधिकतम 68 दिनों का समय होता है। पहले फिल्म के आवेदन की जांच की जाती है। इसमें एक हफ्ते का समय लगता है। इसके बाद फिल्म को जांच समिति के पास भेजा जाता है। उनके पास फिल्म की जांच के लिए 15 दिनों का समय होता है। जांच समिति फिल्म को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पास भेजती है। सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष फिल्म की जांच के लिए अधिकतम 10 दिनों का समय ले सकता है। इसके बाद 36 दिनों के भीतर सेंसर बोर्ड आवेदक को जरूरी कट्स के बारे में जानकारी और सर्टिफिकेट प्रदान करता है।
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सलमान खान की मातृभूमि को सरकार से NOC:CBFC की मंजूरी बाकी, भारत-चीन रिश्तों को ध्यान में रखकर फिल्म में हुए कई बदलाव, जानिए क्यों अटकी फिल्म
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Jr NTR Slams AI Morphed Video of Chuttamalle Song
1 घंटे पहले
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X पर वायरल हो रहे वीडियो में जूनियर NTR की को-स्टार जान्हवी कपूर को आपत्तिजनक तरीके से दिखाया गया है, जिस पर अभिनेता ने कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
साउथ एक्टर जूनियर NTR ने उनकी फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ के गाने ‘चुट्टामल्ले’ के AI से बनाए गए मॉर्फ्ड वीडियो को लेकर भड़क गए। यह गाना जान्हवी कपूर के साथ फिल्माया गया था।
एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यह बेहद घिनौना, शर्मनाक और निंदनीय है। जिस देश में महिलाओं को मां और देवी के रूप में सम्मान दिया जाता है और ‘मातृदेवो भव’ हमारी संस्कृति का हिस्सा है, वहां कुछ लोग AI का इस्तेमाल कर एक महिला का इस तरह अपमान कर रहे हैं।”
मॉर्फ्ड वीडियो बनाने वालों को चेतावनी
जूनियर NTR ने मॉर्फ्ड ‘चुट्टामल्ले’ वीडियो बनाने और उसे फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि ‘चुट्टामल्ले’ के इस मॉर्फ्ड वीडियो को बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ मैं हर संभव कानूनी कार्रवाई करूंगा। मैं उनमें से किसी को भी नहीं छोड़ूंगा।
अभिनेता ने लोगों से ऐसे कंटेंट को बढ़ावा नहीं देने की अपील की। उन्होंने लिखा, “मैं लोगों से अपील करता हूं कि ऐसे कंटेंट को न देखें, न शेयर करें और न ही उस पर प्रतिक्रिया दें। आज यह किसी और के साथ हुआ है, कल आपकी मां, बहन, पत्नी या बेटी भी इसका शिकार हो सकती है।”

जूनियर NTR की पोस्ट।
उन्होंने आगे लिखा, “यह बेहद गंभीर मामला है। मैं सभी राज्य सरकारों और भारत सरकार से अपील करता हूं कि AI के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सख्त नियम बनाए जाएं और कार्रवाई की जाए।”

जान्हवी कपूर ने फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ से बतौर लीड एक्ट्रेस साउथ फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।
‘चुट्टामल्ले’ गाना और फिल्म
‘चुट्टामल्ले’ 2024 में आई एक्शन ड्रामा फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ का रोमांटिक गाना है। इसमें जूनियर NTR और जान्हवी कपूर नजर आए थे।
यह गाना अपनी धुन और दोनों मुख्य कलाकारों की केमिस्ट्री के लिए लोकप्रिय हुआ था।
‘देवरा: पार्ट 1’ की कहानी
कोरटाला शिवा के निर्देशन में बनी ‘देवरा: पार्ट 1’ की कहानी 1980 के दशक के एक तटीय गांव पर आधारित है।
फिल्म में एक ताकतवर समुद्री योद्धा अवैध समुद्री तस्करी के खिलाफ खड़ा होता है। उसे पता चलता है कि इसकी वजह से निर्दोष लोगों को नुकसान हो रहा है।

जान्हवी कपूर ने फिल्म देवरा: पार्ट 1 में थंगम नाम का किरदार निभाया है।
फिल्म में जूनियर NTR, जान्हवी कपूर और सैफ अली खान ने अहम भूमिकाएं निभाईं। प्रकाश राज, श्रीकांत और शाइन टॉम चाको भी फिल्म का हिस्सा थे।
वर्कफ्रंट की बात करें तो जूनियर NTR अपकमिंग फिल्म ‘ड्रैगन’ पर काम कर रहे हैं। इसका निर्देशन ‘KGF’ और ‘सालार’ फेम प्रशांत नील कर रहे हैं। फिल्म 11 जून 2027 को रिलीज होने वाली है।
कई सेलेब्स के AI-जनरेटेड पोस्ट बने हैं
गौरतलब है कि कई सेलिब्रिटी एआई-जनरेटेड कंटेंट का शिकार हो चुके हैं, जिनमें रश्मिका मंदाना, नोरा फतेही और माधुरी दीक्षित जैसे नाम शामिल हैं। मई 2026 में फेक एआई से बने वीडियो और तस्वीरों को लेकर साउथ एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत भड़क गई थीं।
रुक्मिणी ने एक्स अकाउंट पर एक नोट शेयर कर लिखा था, “मेरी टीम और मैंने सोशल मीडिया पर कुछ एआई से बनाई गई तस्वीरें देखी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वो मेरी हैं। मैं साफ कहना चाहती हूं कि ये तस्वीरें पूरी तरह फर्जी और बनाई गई हैं। इस तरह की एडिटेड तस्वीरें बनाना और फैलाना बहुत गैरजिम्मेदाराना है। यह किसी की प्राइवेसी का बड़ा उल्लंघन भी है।”
उन्होंने आगे लिखा था, “हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। इन तस्वीरों को बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी और साइबर क्राइम कार्रवाई शुरू की जा रही है। मैं सभी लोगों से अपील करती हूं कि ऐसे कंटेंट को शेयर न करें और न ही उसे बढ़ावा दें।”

रुक्मिणी वसंत की पोस्ट।
मई 2026 में ही माधुरी दीक्षित का एक रिवीलिंग ब्लैक ड्रेस वाला वीडियो वायरल हुआ था, जिसे बाद में फैक्ट चेक और ट्विटर (X) के कम्युनिटी नोट द्वारा एआई-जनरेटेड और पूरी तरह नकली घोषित किया गया।

माधुरी दीक्षित का जो वीडियो सामने आया था, उसमें वह एक अवॉर्ड फंक्शन में बैठी दिखाई दे रही हैं।
नवंबर 2023 में रश्मिका का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह काले रंग के कपड़ों में एक लिफ्ट के अंदर जाती हुई दिख रही थीं। यह वीडियो पूरी तरह फेक था। मूल वीडियो ब्रिटिश-भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जारा पटेल का था।
AI डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके जारा के चेहरे की जगह रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया था।

जारा पटेल के इस वीडियो में चेहरे पर रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था।
जनवरी 2024 में नोरा फतेही का भी एक फेक वीडियो सामने आया था जिसमें एक क्लोदिंग ब्रांड के एंडोर्समेंट के लिए उनके चेहरे और आवाज का गलत इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने खुद इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालकर इसके फर्जी होने की पुष्टि की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नोरा ने अपने इंस्टा अकाउंट पर यह स्टोरी शेयर करते हुए इस डीपफेक वीडियो की जानकारी दी थी।
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कमाल कर दिया पायलट जी…आपको सैल्यूट:सलमान खान ने की पायलट स्मित मच्छर की तारीफ; रणवीर सिंह, सनी देओल समेत कई सेलेब्स ने की सराहना
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर को-पायलट ने हमला कर दिया। फ्लाइट क्रैश होने की कंडीशन में थी, लेकिन अमित ने जख्मी हालत में भी सूझबूझ से सभी की जान बचाई। शुक्रवार को सलमान खान ने देर रात पायलट स्मित मच्छर की सराहना की है। सलमान खान ने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट से लिखा है, ‘कमाल कर दिया पायलट जी, हम सब आपको सैल्यूट करते हैं। आपके साथ उड़ान भरने में गर्व महसूस होगा। वेल डन ब्रो कैप्टन स्मित मच्छर।’ रणवीर सिंह ने भी सोशल मीडिया पर कैप्टन स्मित की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है- ‘कैप्टन बहादुर।’ अनिल कपूर ने लिखा- ये असाधारण है अनिल कपूर ने एक लंबी-चौड़ी पोस्ट शेयर कर घटना की जानकारी मिलने के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, जब यह घटना हुई, तब जलाल ने मुझे बताया कि वह स्मित को फ्लाइंग स्कूल के दिनों से जानते हैं। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से जानते थे कि किसी मुश्किल परिस्थिति में वे स्मित को अपने साथ रखना चाहेंगे। इस बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि स्मित में शुरू से ही कितना साहस रहा होगा, जिसे उनके आसपास के लोगों ने इतनी कम उम्र में ही पहचान लिया था। आगे अनिल ने लिखा- ‘उस मुश्किल घड़ी में स्मित ने जो किया, वह वाकई असाधारण था। जब इंसान खुद किसी बेहद डरावनी परिस्थिति का सामना कर रहा हो, तब भी मजबूत बने रहना और दूसरों को खुद से पहले रखना, इसके लिए असाधारण हिम्मत चाहिए। स्मित को मेरा दिल से सम्मान और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना।’ सनी देओल ने लिखा- बड़ा हादसा टालने में अहम भूमिका निभाई एक्टर सनी देओल ने कैप्टन स्मित की तारीफ में लिखा है, ‘कैप्टन स्मित मच्छर ने उस वक्त असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। आपने एक बड़े हादसे को टालने और कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। आपके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। सलाम।’ सुनील शेट्टी ने कैप्टन स्मित की तारीफ में लिखा, ‘बहादुरी अक्सर खामोश होती है, लेकिन उसे कभी भुलाया नहीं जाता। कैप्टन स्मित मच्छर और उस मुश्किल घड़ी में आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभालने वाले हर शख्स ने अद्भुत धैर्य, सूझबूझ और हौसले का परिचय दिया। दिल से सम्मान। यह सच्ची सलामी है।’ इन सेलेब्स ने भी की सराहना- जावेद अख्तर बोले- महावीर चक्र के हकदार हैं स्मित जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी अतुलनीय है। वे बिना किसी शक के महावीर चक्र जैसे बड़े सम्मान के हकदार हैं। जावेद अख्तर के अलावा शमिता शेट्टी और रिद्धिमा कपूर साहनी ने भी कैप्टन स्मित के जज्बे की सराहना की है। परेश रावल ने दिया ‘क्रांतिवीर’ फिल्म का रेफरेंस अभिनेता परेश रावल ने कैप्टन के सरनेम ‘मच्छार’ पर चुटकी लेते हुए 1994 में आई अपनी मशहूर फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें नाना पाटेकर का वह मशहूर डायलॉग याद आ रहा है- ‘एक मच्छर आदमी को…!’ वहीं, एक्ट्रेस रवीना टंडन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कई पोस्ट शेयर करके कैप्टन स्मित को असली हीरो बताया। रवि किशन, आर माधवन और विजय देवरकोंडा की प्रतिक्रिया अभिनेता और सांसद रवि किशन ने लिखा कि कैप्टन स्मित मच्छार कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस की मिसाल हैं। खुद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी दूसरों की रक्षा करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। साउथ स्टार विजय देवरकोंडा और बॉलीवुड एक्टर आर माधवन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को शेयर किया। माधवन ने लिखा कि वे देश के इस सच्चे हीरो के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। वहीं विजय देवरकोंडा ने लिखा कि कैप्टन ने जो किया वह अविश्वसनीय है। क्या हुआ था फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में फ्लाईदुबई का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान 174 यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव जा रहा था। जब प्लेन सऊदी अरब के ऊपर उड़ रहा था, तभी कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया। बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अंदर आकर हमलावर को दबोच लिया। इसके बाद प्लेन को तबूक में सेफ लैंड कराया गया। PM मोदी ने भी की वीडियो कॉल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की और हाल-चाल जाना। पीएम ने X पर लिखा कि कैप्टन स्मित एक हीरो हैं। गंभीर खतरे और चोट के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस दिखाया। उनकी बहादुरी से सैकड़ों जिंदगियां बचीं और एक बड़ा हादसा टल गया। पूरे भारत को कैप्टन स्मित पर गर्व है। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम किया। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कॉमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है। इजराइल और गुजरात सरकार सम्मानित करेगी कैप्टन स्मित मच्छर को इजराइल सम्मानित करेगा। भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजार ने इंडिया टुडे से बातचीत में यह जानकारी दी। वहीं, गुजरात सरकार ने भी कैप्टन स्मित को ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ से सम्मानित करने का ऐलान किया है। ट्रम्प और नेतन्याहू ने हीरो बताया था इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की तारीफ की और उन्हें सच्चा हीरो बताया। नेतन्याहू ने कहा कि मच्छर की बहादुरी से विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी कैप्टन मच्छर को हीरो बताया और उनकी बहादुरी की सराहना की।
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हनुमान अंश पर पर बोलीं तमन्ना भाटिया:लोग अपना सनातन कल्चर जानना चाहते हैं, इसलिए बॉक्स ऑफिस पर फिल्में हिट; हनुमान अंश ने कमाए 414 करोड़
एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया ने हनुमान अंश और सनातन संस्कृति पर बन रही फिल्मों की सफलता पर अपनी राय रखी है। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति जितनी स्पिरिचुअल है, उतनी ही साइंटिफिक भी है। आज दर्शक अपनी संस्कृति के बारे में और ज्यादा जानना चाहते हैं। डिमांड के कारण ऐसी कहानियां बनाई जा रही हैं और लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। इस बीच सनातन थीम पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने 56 दिनों में दुनियाभर में 414.06 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया है। साइंस और स्पिरिचुअलिटी एक ही सिक्के के दो पहलू तमन्ना भाटिया ने कहा कि अर्बन इंडिया के लिए अपनी जड़ों और कल्चर को समझना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग हर बात का पहले सबूत मांगते हैं और फिर विश्वास करते हैं, जबकि अध्यात्म का नियम है कि आप विश्वास करें तो अनुभव खुद मिल जाएगा। अपनी फिल्म ‘वन’ में निभाए किरदार का हवाला देते हुए तमन्ना ने बताया कि साइंस और स्पिरिचुअलिटी अलग नहीं हैं, दोनों एक ही बात को कहने के दो अलग तरीके हैं। ‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर से हुई थी मुलाकात तमन्ना ने बताया कि कुछ समय पहले एक पब्लिक वॉशरूम में उनकी मुलाकात ‘हनुमान अंश’ की महिला प्रोड्यूसर से हुई थी। वहां बातचीत के दौरान तमन्ना ने उन्हें फिल्म की सफलता पर बधाई दी। तमन्ना ने कहा कि मेकर्स ने बहुत कठिनाइयों के साथ यह फिल्म बनाई है और आज इसे जो रिस्पॉन्स मिल रहा है, उससे वे काफी खुश हैं। जब कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़े आंकड़े लेकर आती है, तो उसकी सफलता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। ‘सनातन फिल्मों का हिस्सा बनने में दिक्कत नहीं’ आगे भी धार्मिक या पौराणिक विषयों पर काम करने के सवाल पर तमन्ना ने कहा कि अगर किसी कहानी का लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है तो वे ऐसी फिल्मों का हिस्सा जरूर बनना चाहेंगी। भारतीय पौराणिक कथाओं में कई ऐसे किरदार हैं जिन्हें पर्दे पर उतारा जा सकता है। अपने एक पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने छठी मैया का गाना किया था, तब पटना के एक कॉलेज में किसी ने उनसे कहा था कि ऊपर वाले ने इस काम के लिए खुद आपको चुना है। ‘हनुमान अंश’ ने 56 दिनों में कमाए 414.06 करोड़ रुपए सनातन और पौराणिक बैकग्राउंड पर बनी फिल्मों की सफलता का बड़ा उदाहरण ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन है। फिल्म ने अपनी रिलीज के 56वें दिन 4,345 शो के जरिए 2.90 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई 317.38 करोड़ रुपए और कुल ग्रॉस कलेक्शन 374.86 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ओवरसीज मार्केट में फिल्म ने 56वें दिन 0.10 करोड़ रुपए जोड़कर कुल 39.20 करोड़ रुपए की कमाई की है। इन आंकड़ों को मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 414.06 करोड़ रुपए हो गया है।
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174 लोगों को बचाने वाले पायलट को बॉलीवुड का सलाम:जावेद अख्तर बोले- स्मित को महावीर चक्र मिले; माधवन-देवरकोंडा समेत कई सेलेब्स ने की तारीफ
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट के हमले के बाद भी 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर कई बॉलीवुड सेलेब्स ने रिएक्शन दिया है। लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने मांग की है कि कैप्टन स्मित को देश का दूसरा सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘महावीर चक्र’ दिया जाना चाहिए। वहीं, परेश रावल, रवीना टंडन, रवि किशन, विजय देवरकोंडा और आर माधवन समेत कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर कैप्टन की हिम्मत और सूझबूझ की तारीफ की है। जावेद अख्तर बोले- महावीर चक्र के हकदार हैं स्मित जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी अतुलनीय है। वे बिना किसी शक के महावीर चक्र जैसे बड़े सम्मान के हकदार हैं। जावेद अख्तर के अलावा शमिता शेट्टी और रिद्धिमा कपूर साहनी ने भी कैप्टन स्मित के जज्बे की सराहना की है। परेश रावल ने दिया ‘क्रांतिवीर’ फिल्म का रेफरेंस अभिनेता परेश रावल ने कैप्टन के सरनेम ‘मच्छार’ पर चुटकी लेते हुए 1994 में आई अपनी मशहूर फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें नाना पाटेकर का वह मशहूर डायलॉग याद आ रहा है- ‘एक मच्छर आदमी को…!’ वहीं, एक्ट्रेस रवीना टंडन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कई पोस्ट शेयर करके कैप्टन स्मित को असली हीरो बताया। रवि किशन, आर माधवन और विजय देवरकोंडा की प्रतिक्रिया अभिनेता और सांसद रवि किशन ने लिखा कि कैप्टन स्मित मच्छार कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस की मिसाल हैं। खुद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी दूसरों की रक्षा करना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। साउथ स्टार विजय देवरकोंडा और बॉलीवुड एक्टर आर माधवन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को शेयर किया। माधवन ने लिखा कि वे देश के इस सच्चे हीरो के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। वहीं विजय देवरकोंडा ने लिखा कि कैप्टन ने जो किया वह अविश्वसनीय है। क्या हुआ था फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में फ्लाईदुबई का बोइंग 737 मैक्स 8 विमान 174 यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव जा रहा था। जब प्लेन सऊदी अरब के ऊपर उड़ रहा था, तभी कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया। बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अंदर आकर हमलावर को दबोच लिया। इसके बाद प्लेन को तबूक में सेफ लैंड कराया गया। PM मोदी ने भी की वीडियो कॉल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की और हाल-चाल जाना। पीएम ने X पर लिखा कि कैप्टन स्मित एक हीरो हैं। गंभीर खतरे और चोट के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस दिखाया। उनकी बहादुरी से सैकड़ों जिंदगियां बचीं और एक बड़ा हादसा टल गया। पूरे भारत को कैप्टन स्मित पर गर्व है। स्पाइसजेट में 11 साल पायलट रह चुके हैं कैप्टन स्मित फ्लाईदुबई से पहले स्मित ने 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में काम किया। यहां उन्होंने 9500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। इनमें 6400 घंटे से ज्यादा समय विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड के तौर पर था। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें कॉमर्शियल विमान उड़ाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बोइंग 737 विमानों पर करीब 9750 घंटे उड़ान भरी है।
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मूवी रिव्यू- ‘प्रेम कीटाणु’:प्यार की तलाश में निकले वीर पहाड़िया की कहानी में है हंसी, उलझन और एक मजेदार ट्विस्ट; जानिए कैसी है फिल्म
कॉलेज में किसी पर दिल आ जाए तो लगता है कहानी बस इतनी सी है, लेकिन कभी प्यार पूरा होने से पहले ही कोई नया मोड़ आ जाता है और फिर वही कहानी चार साल बाद एक बिल्कुल अलग दुनिया में लौटती है। फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ इसी प्यार, दोस्ती और जिंदगी के बदलते रंगों को हल्के फुल्के अंदाज में लेकर चलती है। फिल्म हंसाती है, रिलेट करती है और बीच बीच में जिंदगी की थोड़ी सी कड़वी सच्चाई भी दिखा देती है। फिल्म की कहानी कैसी है कहानी बनारस के इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरू होती है। एडमिशन के दौरान विशाल ठाकुर (वीर पहाड़िया) और सुहानी (आफिया सैयद) पहली बार आमने सामने आते हैं। पहली मुलाकात नोकझोंक में बदलती है और दोनों एक दूसरे को श्राप दे बैठते हैं कि चार साल तक विशाल की कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनेगी और सुहानी का कोई बॉयफ्रेंड नहीं होगा। इसके बाद दोनों अलग अलग कॉलेज चले जाते हैं। चार साल की कॉलेज लाइफ में विशाल की जिंदगी में प्यार की दस्तक तो होती है, लेकिन बात मुकम्मल नहीं हो पाती। उधर सुहानी अपनी पढ़ाई और फिर करियर की तरफ बढ़ती है। चार साल बाद दोनों की जिंदगी कॉलेज से निकलकर नौकरी की दुनिया में पहुंच चुकी है। सुहानी को अच्छी नौकरी मिलती है, जबकि विशाल को करियर और जिंदगी की अपनी जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है। फिर दोनों की मुलाकात होती है और यहीं से पुरानी कहानी नए हालात में दोबारा खुलती है। फिल्म सिर्फ यह नहीं पूछती कि दोनों प्यार में पड़ेंगे या नहीं, बल्कि यह भी देखती है कि वक्त के साथ बदले दो लोग एक दूसरे की जिंदगी में फिर जगह बना पाएंगे या नहीं। इसी के साथ दोस्ती, परिवार और जिम्मेदारियां कहानी को थोड़ा और बड़ा बनाती हैं। फिल्म में एक्टिंग कैसी है वीर पहाड़िया विशाल के किरदार में सहज हैं। कॉलेज के मस्तमौला लड़के से लेकर जिंदगी की परेशानियों से जूझते युवा तक वह किरदार के बदलाव को स्वाभाविक रखते हैं। आफिया सैयद की यह पहली फिल्म है और वह सुहानी के किरदार में फ्रेश लगती हैं। वीर के साथ उनकी नोकझोंक और केमिस्ट्री फिल्म के रोमांटिक हिस्सों में अच्छी लगती है। निखिल विजय फिल्म की जान हैं। मगन अरोड़ा बनकर उनकी कॉमिक टाइमिंग, पंच और वीर के साथ झगड़बंदी कई जगह जबरदस्त मजा देती है। कहानी जहां थोड़ी धीमी पड़ती है, निखिल वहां माहौल फिर से गर्म कर देते हैं। अपारशक्ति खुराना ने अपने किरदार को पूरे अंदाज में निभाया है और उसे इंटरेस्टिंग रखा है। हां, किरदार की लिखावट थोड़ी और मजबूत होती तो उनकी परफॉर्मेंस का असर और बढ़ सकता था। फिल्म का डायरेक्शन कैसा है? अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म को हल्का और यूथफुल रखा है। कॉलेज की मस्ती से लेकर नौकरी और जिम्मेदारियों वाली जिंदगी तक टोन बदलता है, लेकिन फिल्म जरूरत से ज्यादा भारी नहीं होती। राइटर दीपक किंगरानी, जिन्हें सिर्फ एक बंदा काफी है के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिल चुका है, ने रिश्तों, दोस्ती और कॉमेडी को सहज अंदाज में पिरोया है। स्क्रीनप्ले की अच्छी बात यह है कि कहानी सिर्फ रोमांस पर नहीं टिकी। परिवार और दोस्ती को भी जगह मिलती है। हां, बीच में रफ्तार थोड़ी ढीली पड़ती है और कुछ मोड़ पहले से भांपे जा सकते हैं। इमोशनल हिस्सों में थोड़ा और ठहराव होता तो कहानी का असर और बढ़ता। तकनीकी तौर पर फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट रंगीन और यूथफुल है। कॉलेज और बनारस का माहौल कहानी को अपनी अलग फील देता है। फिल्म का म्यूजिक कैसा है ‘कहो तो’, ‘तू मेरा रइयो’ और ‘इश्क का गुलाम’ फिल्म के रोमांटिक और यूथफुल मूड को अच्छे से सपोर्ट करते हैं। गाने कहानी से अलग नहीं लगते और फिल्म की फील को बनाए रखते हैं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट प्यार की मस्ती, दोस्ती की शरारत और जिंदगी की थोड़ी सी कड़वी मिठास, ‘प्रेम कीटाणु’ इन तीनों का अच्छा कॉम्बिनेशन है। निखिल विजय खूब हंसाते हैं, वीर और आफिया की जोड़ी जमती है। थोड़ी कसावट की कमी जरूर है, लेकिन ये फिल्म मुस्कुराने और पुराने कॉलेज वाले दिनों को याद करने का अच्छा बहाना है।
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Ayushmann Khurrana Success Story; RJ MTV VJ Indian Idol Rejection
2 घंटे पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र
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कभी रेडियो जॉकी और टीवी होस्ट रहे आयुष्मान ने रिजेक्शन और उतार-चढ़ाव के बावजूद जोखिम उठाए और अपनी प्रतिभा से बॉलीवुड में खास मुकाम बनाया।
आयुष्मान खुराना आज बॉलीवुड के उन एक्टर्स में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी अलग तरह की फिल्मों से इंडस्ट्री में पहचान बनाई। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। चंडीगढ़ से निकले आयुष्मान ने थिएटर किया, रेडियो जॉकी बने, एमटीवी पर वीजे रहे और कई ऑडिशन दिए। उन्हें इंडियन आइडल-2 में भी रिजेक्शन मिला।
2012 में ‘विक्की डोनर’ से फिल्मी करियर शुरू हुआ। पहली फिल्म हिट हुई, लेकिन इसके बाद लगातार तीन फिल्में नहीं चलीं। फिर ‘दम लगा के हईशा’ से करियर ने दोबारा रफ्तार पकड़ी। इसके बाद ‘बरेली की बर्फी’, ‘शुभ मंगल सावधान’, ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’, ‘आर्टिकल 15’, ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘बाला’ जैसी फिल्मों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
आज की सक्सेस स्टोरी में आयुष्मान खुराना के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें…

चंडीगढ़ में हुआ जन्म, पिता ज्योतिषी
आयुष्मान खुराना का जन्म 14 सितंबर 1984 को चंडीगढ़ में हुआ। उनकी शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ के सेंट जॉन्स हाई स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की और पंजाब यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन स्टडीज से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।
उनके पिता पी. खुराना जाने-माने ज्योतिषी थे, जबकि मां पूनम खुराना ने हिंदी में एमए किया था। परिवार का माहौल पढ़ाई, साहित्य और कला से जुड़ा रहा। आयुष्मान ने कॉलेज के दिनों में थिएटर किया और दो थिएटर ग्रुप भी बनाए।

डॉक्टर बनने का सपना था, डेंटिस्ट की सीट भी मिली थी
एक्टिंग की दुनिया में आने से पहले आयुष्मान ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उन्होंने 11वीं में साइंस ली थी और कर्नाटक के एक डेंटल कॉलेज में उन्हें सीट भी मिल गई थी।
लेकिन तभी उनका रुझान थिएटर की तरफ बढ़ा। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर आर्ट्स और थिएटर चुना। डीएवी कॉलेज में उन्होंने थिएटर ग्रुप बनाए और स्ट्रीट प्ले किए। थिएटर में काम करते हुए आयुष्मान ने सामाजिक मुद्दों को समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी फिल्मों के विषयों में भी दिखाई दिया।
रोडीज जीते, लेकिन तुरंत मुंबई नहीं आए
2004 में आयुष्मान ने एमटीवी रोडीज सीजन-2 जीता। इसके बाद उन्हें पहचान मिलने लगी, लेकिन उन्होंने तुरंत मुंबई जाकर फिल्मों में किस्मत नहीं आजमाई। पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने रेडियो में काम शुरू किया। बाद में वे एमटीवी के वीजे बने और कई शो होस्ट किए।
फिल्मों में आने से पहले आयुष्मान ने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे सितारों का इंटरव्यू भी लिया था। फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि इन सितारों से बातचीत ने उन्हें समझने में मदद की कि स्टार भी आम इंसानों की तरह होते हैं।

पिता ने कहा- अभी मुंबई जाओ, वरना दो साल नौकरी नहीं मिलेगी
आयुष्मान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दो महीने का ब्रेक लेकर एक्टिंग की तैयारी करना चाहते थे। लेकिन उनके पिता ने उन्हें तुरंत मुंबई जाने के लिए कहा। आयुष्मान के मुताबिक, उनके पिता ने कहा था कि अगर अभी नहीं गए तो दो साल तक नौकरी नहीं मिलेगी। इसके बाद वह मुंबई आ गए।
शुरुआती दिनों में उनके पास रहने की जगह भी नहीं थी। वह अपने डॉक्टर दोस्त के साथ केईएम हॉस्पिटल के हॉस्टल में रहे और ऑडिशन देते रहे।
ट्रेन में गाने से कमाए पैसे
फिल्म स्टार बनने से बहुत पहले आयुष्मान और उनके दोस्त ट्रेनों में परफॉर्म करते थे। उन्होंने बताया था कि कॉलेज के दौरान वे पश्चिम एक्सप्रेस में दोस्तों के साथ चढ़ते और अलग-अलग कोच में गाना-परफॉर्म करना शुरू कर देते थे।
यात्रियों से मिलने वाले पैसे इकट्ठा किए जाते थे और आयुष्मान के मुताबिक, इतनी कमाई हो जाती थी कि दोस्तों ने उससे गोवा ट्रिप तक स्पॉन्सर की थी।
इंडियन आइडल से भी हुए रिजेक्ट
आयुष्मान का स्ट्रगल सिर्फ एक्टिंग ऑडिशन तक सीमित नहीं था। उन्होंने इंडियन आइडल-2 में भी हिस्सा लिया था, लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह मुंबई राउंड तक पहुंचे थे और वहां उन्हें रिजेक्शन मिला। उनके मुताबिक, मुंबई आने से पहले भी उन्हें कई रिजेक्शन मिल चुके थे।

2012 में ‘विक्की डोनर’ पहली ही फिल्म ने बदल दी जिंदगी
2012 में आयुष्मान ने शूजित सरकार की ‘विक्की डोनर’ से बॉलीवुड डेब्यू किया। फिल्म का विषय उस दौर के लिए काफी असामान्य था और आयुष्मान ने स्पर्म डोनर का किरदार निभाया। फिल्म सफल रही और आयुष्मान को रातोंरात पहचान मिली। उन्हें फिल्म के लिए बेस्ट मेल डेब्यू के साथ प्लेबैक सिंगिंग के लिए भी अवॉर्ड मिला।
लेकिन पहली फिल्म की सफलता के बाद उनका सफर उतना आसान नहीं रहा, जितना बाहर से दिखाई देता था।
पहली फिल्म के बाद लगातार तीन फ्लॉप, करियर पर लगा ब्रेक
‘विक्की डोनर’ के बाद आयुष्मान की ‘नौटंकी साला!’, ‘बेवकूफियां’ और ‘हवाईजादा’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। खुद आयुष्मान ने माना कि ‘विक्की डोनर’ के बाद वह काफी कन्फ्यूज थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किस तरह की फिल्में करनी चाहिए। उन्होंने बाद में बताया कि तीन लगातार फिल्मों के अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के बाद उनका नजरिया बदला।
‘दम लगा के हईशा’ ने फिर बदली कहानी
2015 में आई ‘दम लगा के हईशा’ आयुष्मान के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी। फिल्म में उन्होंने ऐसे लड़के का किरदार निभाया जो पढ़ाई में कमजोर है और जिसकी शादी उससे ज्यादा पढ़ी-लिखी और वजनदार लड़की से हो जाती है। फिल्म की कहानी आम बॉलीवुड रोमांस से अलग थी और आयुष्मान की परफॉर्मेंस को खूब सराहा गया। आयुष्मान बताते हैं कि ‘दम लगा के हईशा’ के आने के बाद उनके करियर की दिशा बदल गई।
फिर शुरू हुआ अलग कहानियों का दौर
इसके बाद आयुष्मान ने एक के बाद एक ऐसे विषय चुने, जिनसे मुख्यधारा के कई अभिनेता दूरी बनाते रहे। ‘बरेली की बर्फी’ में छोटे शहर की कहानी, ‘शुभ मंगल सावधान’ में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसा संवेदनशील विषय, ‘अंधाधुन’ में ब्लाइंड पियानो प्लेयर, ‘बधाई हो’ में उम्रदराज माता-पिता की प्रेग्नेंसी, ‘आर्टिकल 15’ में जातिगत भेदभाव, ‘ड्रीम गर्ल’ में फोन पर लड़की की आवाज निकालने वाला युवक और ‘बाला’ में समय से पहले बाल झड़ने की समस्या जैसे विषय सामने आए।
यहीं से आयुष्मान की एक अलग तरह की फिल्मी पहचान बनने लगी। आयुष्मान कहते हैं कि उनका पूरा करियर रिस्क से बना है और वह सामान्य कमर्शियल फिल्म में खुद को आसानी से नहीं देख पाते।
‘अंधाधुन’ और ‘बधाई हो’ ने स्टारडम मजबूत किया
2018 आयुष्मान के करियर के सबसे महत्वपूर्ण सालों में रहा। ‘अंधाधुन’ ने उन्हें अभिनेता के तौर पर नई ऊंचाई दी, जबकि ‘बधाई हो’ ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। ‘अंधाधुन’ ने भारत के अलावा चीन में भी जबरदस्त कारोबार किया। वहीं ‘बधाई हो’ ने भारत में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन किया।
इसी दौर में आयुष्मान ने साबित किया कि कम बजट और असामान्य विषय वाली फिल्में भी दर्शकों तक पहुंच सकती हैं।

पत्नी ताहिरा ने स्क्रिप्ट चुनने में निभाई अहम भूमिका
आयुष्मान और ताहिरा कश्यप की मुलाकात किशोरावस्था में हुई थी और दोनों ने 2008 में शादी की। ताहिरा लेखक, निर्देशक और क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं। आयुष्मान कई बार बता चुके हैं कि फिल्म साइन करने से पहले वह ताहिरा की राय लेते हैं।
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद वह ताहिरा को भी देते हैं। दोनों स्क्रिप्ट पर विस्तार से चर्चा करते हैं और मतभेद होने पर उसके फायदे-नुकसान देखते हैं।
आयुष्मान ने ताहिरा को अपना ‘लाइफ कोच’ भी बताया है।
सफलता के बाद भी फ्लॉप का दौर आया
आयुष्मान के करियर में सिर्फ सफलता नहीं रही। ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’, ‘अनेक’, ‘डॉक्टर जी’ और ‘एन एक्शन हीरो’ जैसी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी उनके सफल दौर में मिली थी। इससे साफ हुआ कि अलग विषय चुनने का मतलब हर बार बॉक्स ऑफिस सफलता की गारंटी नहीं है।
लेकिन आयुष्मान ने अपने करियर की दिशा पूरी तरह नहीं बदली। उन्होंने अलग जॉनर और नए किरदार आजमाने जारी रखे।
‘हर फिल्म रिस्क थी, इसलिए अब डर नहीं सकता’
आयुष्मान के करियर की खास बात यही है कि उन्होंने शुरुआत ही एक रिस्की विषय से की थी। उनके शब्दों में- तक पहुंचा हूं, तो मैं डर नहीं सकता हूं। मेरी हर फिल्म रिस्क थी, शायद बाकी एक्टर्स के मुकाबले। मैं रिस्क लेकर यहां तक पहुंचा हूं, तो मैं डर नहीं सकता हूं।”
यही सोच उनके करियर में बार-बार दिखाई देती है। कभी स्पर्म डोनर, कभी नपुंसकता से जूझता युवक, कभी अंधा पियानो प्लेयर, कभी जातिगत भेदभाव के खिलाफ खड़ा पुलिस अफसर और कभी माता-पिता की प्रेग्नेंसी से परेशान बेटा।

40 की उम्र के बाद भी प्रयोग जारी
आयुष्मान ने उम्र बढ़ने के साथ अपने करियर का दायरा भी बढ़ाया है। ‘डॉक्टर जी’ और ‘एन एक्शन हीरो’ के बाद उन्होंने अलग जॉनर आजमाए। 2025 में वह ‘थामा’ में नजर आए, जो मैडॉक फिल्म्स के हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा थी। फिल्म में उनके साथ रश्मिका मंदाना, परेश रावल और नवाजुद्दीन सिद्दीकी थे।
2026 में भी उनका प्रयोग जारी है। उनकी आने वाली फिल्मों में ‘ये प्रेम मोल लिया’ और ‘उड़ता तीर’ शामिल हैं। ‘उड़ता तीर’ 9 अक्टूबर को रिलीज होगी। वहीं राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले बनी ‘ये प्रेम मोल लिया’ में आयुष्मान शरवरी वाघ के साथ नजर आएंगे। यह फिल्म 27 नवंबर को रिलीज होगी। इसका निर्देशन सूरज बड़जात्या ने किया है।
एक्टिंग के साथ सिंगिंग में भी बनाई पहचान
आयुष्मान खुराना की पहचान सिर्फ एक्टर के तौर पर नहीं है। वह अच्छे सिंगर भी हैं और कॉलेज के दिनों से संगीत उनके करियर का हिस्सा रहा है। उन्होंने डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान अपने दोस्त रोचक कोहली के साथ मिलकर ‘पानी दा रंग’ गाना लिखा और कंपोज किया था। यह गाना उन्होंने 2003 में लिखा था, लेकिन इसे रिलीज होने का मौका करीब 9 साल बाद मिला।
2012 में फिल्म ‘विक्की डोनर’ से आयुष्मान ने बॉलीवुड डेब्यू किया और इसी फिल्म के गाने ‘पानी दा रंग’ को अपनी आवाज भी दी। उन्होंने गाना सिर्फ गाया नहीं, बल्कि रोचक कोहली के साथ इसे कंपोज भी किया था। गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि आयुष्मान को फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर मिला।
इसके बाद आयुष्मान ने ‘नौटंकी साला’, ‘बेवकूफियां’ जैसी फिल्मों के लिए भी प्लेबैक सिंगिंग की। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह खुद को ‘एक्टर-सिंगर’ मानते हैं और म्यूजिक को अपने करियर का समानांतर हिस्सा समझते हैं।
आयुष्मान की संगीत की ट्रेनिंग भी रही है। उन्होंने बताया था कि वह बचपन से गाते थे और उन्हें वोकल ट्रेनिंग मिली थी, हालांकि यह ट्रेनिंग औपचारिक तरीके से नहीं हुई थी। उनके पिता भी संगीत में रुचि रखते थे और बांसुरी बजाते थे।
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पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़ें..
पहली फिल्म बंद हुई, अंडे-शकरकंद खाकर गुजारा किया:सिद्धार्थ मल्होत्रा बोले- ढीठपन और अड़ियलपन ने बचाया, ‘शेरशाह’ ने दी नई पहचान

दिल्ली के मिडिल क्लास, आर्मी-मर्चेंट नेवी बैकग्राउंड वाले परिवार से निकले सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कभी खुलकर नहीं कहा था कि उन्हें एक्टर बनना है। स्कूल-कॉलेज में एमबीए और कॉर्पोरेट नौकरी का प्लान था, लेकिन अंदर छिपा एक्टर मॉडलिंग के रास्ते सामने आया। 21 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे तो फिल्म साइन होने के बावजूद प्रोजेक्ट बंद हो गया।पूरी खबर पढ़ें..
खबरें और भी हैं… -

'छठी मैया' गाने की शूटिंग में इमोशनल हुईं तमन्ना:बोलीं- 4 साल पहले रोल मिलता तो नहीं कर पाती; थिएटर्स के बाहर जूते-चप्पल उतारकर जा रहे लोग
एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘द वन’ को लेकर काफी सुर्खियों में हैं। फिल्म में उनका किरदार और खासतौर पर ‘छठी मैया’ गाना चर्चा में है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में तमन्ना ने छठ महापर्व से अपने भावनात्मक जुड़ाव, स्पिरिचुअलिटी और सनातन पर खुलकर बात की। तमन्ना ने बताया कि सिनेमाघरों में दर्शक इस फिल्म को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि एक पर्व की तरह देख रहे हैं; लोग थिएटर में पॉपकॉर्न छोड़कर ठेकुआ बांट रहे हैं और जूते-चप्पल बाहर उतारकर हॉल में जा रहे हैं। सवाल: ‘द वन’ की स्क्रिप्ट जब पहली बार आपके पास आई, तो आपने इसमें काम करने के लिए ‘हां’ क्यों कहा?
जवाब: मुझे लगा कि यह बहुत ही दिलचस्प कॉन्सेप्ट है, जो लोककथा, फैंटेसी और आस्था को एक साथ लेकर आता है। हमारे देश में ऐसी कई कथाएं हैं जो अब तक आम लोगों तक नहीं पहुंची हैं। छठ महापर्व को करीब 30 से 40 करोड़ लोग मनाते हैं। हमने होली-दिवाली तो फिल्मों में बहुत देखी है, लेकिन छठ जैसे महापर्व को पहली बार इतने बड़े पैमाने पर बड़े पर्दे पर दिखाया गया है। साथ ही, इस एक्शन फिल्म के केंद्र में एक गहरा इमोशन है। मुझे बचपन से ही ‘द ममी’ जैसी फिल्में पसंद रही हैं, जिनमें मैजिक और फोकलोर होता है। इसलिए मुझे लगा कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे पूरी फैमिली साथ बैठकर देख सकती है। सवाल: फिल्म में ‘छठी मैया’ का गाना करते समय आप इमोशनल हो गईं थी। आपके अंदर क्या भावनात्मक और आध्यात्मिक बदलाव आए?
जवाब: जब मैंने पहली बार विशाल मिश्रा की आवाज में यह गाना सुना, तो लगा कि यह हर भक्त की अंदरूनी भावना है। शूटिंग के दौरान जब मैं सूर्य देव को अर्घ्य देने का रिचुअल कर रही थी, तब मुझे एक बहुत बड़ी बात समझ में आई, जिस चीज का अस्त होता है, उसका उदय भी निश्चित है। हम जिंदगी में कई बार उतार-चढ़ाव देखकर निराश हो जाते हैं, लेकिन छठ महापर्व हमें सिखाता है कि डूबते सूरज के बाद उगता सूरज जरूर आता है। इस गाने ने मुझे ग्रेटिट्यूड का गहरा भाव महसूस कराया। सवाल: थिएटर से दर्शकों का किस तरह का रिएक्शन मिल रहा है, क्या आपने इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद की थी?
जवाब: सच कहूं तो हमने फिल्म बनाते समय ऐसा बिल्कुल नहीं सोचा था। लेकिन अब जब मैं रील्स और वीडियो देख रही हूं, तो लोग सिनेमाघर के बाहर अपने जूते-चप्पल उतारकर अंदर जा रहे हैं। लोग हॉल में पॉपकॉर्न छोड़ ठेकुआ बांट रहे हैं। बिहार, पटना और झारखंड से जिस तरह का प्यार मिल रहा है, वैसा मैंने लंबे समय से किसी फिल्म के लिए नहीं देखा। कई लोग थिएटर में भावुक होकर रो रहे हैं, क्योंकि यह उनकी आस्था से जुड़ा है। यह देखना मेरे लिए बहुत मैजिकल है। सवाल: आप खुद शिव भक्त हैं और स्पिरिचुअल हैं। क्या इस जुड़ाव ने आपको इस रोल को निभाने में मदद की?
जवाब: बिल्कुल। करीब चार साल पहले जब मैं अपने गुरु से मिली, तब मेरी असल स्पिरिचुअल जर्नी शुरू हुई। मुझे लगता है कि अगर यह फिल्म मुझे 4 साल पहले ऑफर होती, तो शायद मैं इसे उस तरह नहीं कर पाती। क्योंकि भक्ति एक ऐसा भाव है जिसमें आप कोई मिलावट या झूठी एक्टिंग नहीं कर सकते। अगर आपके अंदर वह भाव सच्चा नहीं है, तो दर्शक तुरंत पकड़ लेते हैं। पटना में एक स्टूडेंट ने मुझसे कहा था कि आप यह गाना इसलिए कर पाईं क्योंकि ऊपर वाले ने आपको इसके लिए चुना है। सवाल: आजकल सनातन और भारतीय संस्कृति पर आधारित फिल्मों को दर्शकों का काफी प्यार मिल रहा है। इस दौर को आप कैसे देखती हैं?
जवाब: यह बहुत जरूरी दौर है, खासकर अर्बन इंडिया के लिए। हम हर चीज को लॉजिक और सबूत से तौलने की कोशिश करते हैं। सनातन संस्कृति में जो बातें कही गई हैं, वे जितनी स्पिरिचुअल हैं, उतनी ही साइंटिफिक भी हैं। स्पिरिचुअलिटी कहती है कि आप पहले विश्वास कीजिए, अनुभव अपने आप मिल जाएगा। आज लोग अपनी संस्कृति के बारे में और जानना चाहते हैं, इसलिए जब उन्हें ऐसी सच्ची कहानियां मिलती हैं, तो फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। सवाल: फिल्मों में सिनेमैटिक लिबर्टी और कल्चरल ऑथेंटिसिटी के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल होता है?
जवाब: आपका इरादा सही होना चाहिए। जब हमने छठ का पूरा सीक्वेंस शूट किया, तो सभी नियमों और प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा। हमारे डायरेक्टर दीपक यूपी-बिहार बेल्ट से हैं, इसलिए वे बहुत पर्टिकुलर थे। हम कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं बना रहे थे, बल्कि एक कहानी के जरिए छठ की आस्था और इमोशन को लोगों तक पहुंचा रहे थे। उस इमोशन को फील कराने के लिए थोड़ी सिनेमैटिक लिबर्टी लेनी पड़ती है, ताकि दर्शक उस श्रद्धा को गहराई से महसूस कर सकें। ‘वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन फिल्म ‘वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ ने अपनी रिलीज के छठे दिन 7,070 शो के जरिए ₹4.25 करोड़ का नेट कलेक्शन दर्ज किया है। इस कमाई के साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹49.10 करोड़ और कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹58.42 करोड़ तक पहुंच गया है। ओवरसीज मार्केट की बात करें तो फिल्म ने छठे दिन ₹0.50 करोड़ की कमाई की, जिससे इसका कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹5.00 करोड़ हो गया है। इन आंकड़ों को मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब ₹63.42 करोड़ हो चुका है। फिल्म 25 सितंबर को रिलीज हुई थी।
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Mukesh Khanna Criticizes Ranbir Kapoor Ramayan Movie
13 घंटे पहले
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‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण का किरदार निभा रहे हैं। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी यह फिल्म दो हिस्सों में रिलीज होगी।
मुकेश खन्ना ने रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम के चित्रण पर सवाल उठाए। उन्होंने फिल्म में ज्यादा VFX और एक्शन दिखाने पर आपत्ति जताई।
मुकेश खन्ना ने कहा कि फिल्म में भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम की खूबियों के बजाय एक्शन हीरो जैसा दिखाया गया है। उन्होंने रणबीर कपूर के पेड़ पर चढ़कर तीर चलाने वाले सीन पर भी सवाल उठाया।
बॉलीवुड नाउ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। मुस्कुराते थे। श्री राम को सलमान खान, अमिताभ बच्चन बना दिया, रजनीकांत बना दिया।”
भगवान राम के एक्शन सीन पर सवाल
मुकेश खन्ना ने उस सीन पर खास तौर पर आपत्ति जताई, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में पेड़ पर चढ़कर तीर चलाते दिख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रामायण के जिन संस्करणों को उन्होंने पढ़ा या देखा है, उनमें भगवान राम को इस तरह नहीं दिखाया गया।
मुकेश खन्ना ने कहा, “रामजी ऐसे फाइट नहीं करते थे।” उन्होंने आगे कहा कि किरदार को मैन ऑफ एक्शन बना दिया गया है।

अभिनेता मुकेश खन्ना ने बी.आर. चोपड़ा के सीरियल महाभारत (1988-1990) में भीष्म पितामह का किरदार निभाया था।
VFX के इस्तेमाल पर भी आपत्ति
मुकेश खन्ना ने ‘रामायण’ में किए गए बड़े पैमाने के विजुअल इफेक्ट्स यानी VFX पर भी बात की।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दर्शक फिल्म को बड़े स्तर की फैंटेसी फिल्म के रूप में देख सकते हैं। वहीं, भारतीय दर्शक भगवान राम के चित्रण को धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से देखेंगे।
उन्होंने कहा, “लेकिन भारत में अगर आप राम दिखा रहे हो, तो आस्था से दिखाओ।”
रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता: शिव सागर
इससे पहले फिल्ममेकर और 1987 की चर्चित टीवी सीरीज ‘रामायण’ बनाने वाले रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने रणबीर कपूर की कास्टिंग पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि ‘एनिमल’ में रणबीर का किरदार देखने के बाद उनके लिए उन्हें भगवान राम के रूप में स्वीकार करना मुश्किल है।

शिव सागर टीवी प्रोड्यूसर हैं।
शिव सागर के मुताबिक, भगवान राम जैसे किरदार के लिए किसी फ्रेश फेस को चुना जाना चाहिए था। उनका कहना है कि नए चेहरे के साथ दर्शकों की पहले से कोई इमेज नहीं जुड़ी होती।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें रणबीर कपूर की एक्टिंग से कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने रणबीर को अच्छा एक्टर बताया था। शिव सागर ने फिल्म की बाकी कास्टिंग, खासकर यश और साई पल्लवी की भी तारीफ की थी। पूरी खबर यहां पढे़ं…
रणबीर ने दिया था जवाब
जुलाई में फिल्म के सैन डिएगो कॉमिक-कॉन शोकेस के दौरान रणबीर कपूर ने भगवान राम के किरदार के लिए अपनी कास्टिंग पर हुई आलोचना का जवाब दिया था।

रामायण का टीजर 23 जुलाई 2026 को अमेरिका के सैन डिएगो कॉमिक-कॉन (SDCC) में प्रस्तुत किया गया था।
रणबीर ने कहा था, “रामायण देखने वाले हर व्यक्ति की भगवान राम को लेकर अपनी एक अलग छवि और व्याख्या होती है। इसका कोई एक तय चेहरा नहीं है। बहुत से लोग सोच सकते हैं कि मैं गलत कास्टिंग हूं, तो कुछ को लगेगा कि मैं सही कास्टिंग हूं। लेकिन ईमानदारी से कहूं तो राम के किरदार के लिए सही कास्टिंग वही अभिनेता होगा, जिसके पास सही नीयत, विश्वास और इस यात्रा के प्रति आस्था हो।”

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‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज: भगवान राम-सीता के विवाह की झलक दिखी; श्रेया घोषाल-अरिजीत सिंह ने आवाज दी

फिल्म ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के अवसर पर रिलीज हुआ था। गाने को श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज दी है। इसके म्यूजिक को ए.आर. रहमान ने कंपोज, प्रोड्यूस और अरेंज किया है। गाने के लिरिक्स डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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बाली में नुसरत भरूचा का एक्सीडेंट:दावा- चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती, काम के सिलसिले में गई थीं एक्ट्रेस
एक्ट्रेस नुसरत भरूचा का बाली में एक्सीडेंट हो गया। हादसे में उन्हें चोट लगी है। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। ऐसा दावा एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में किया है। हालांकि, उनकी चोट कितनी गंभीर है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई। एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि नुसरत बाली में एक काम के सिलसिले में गई थीं। इसी दौरान वह हादसे का शिकार हो गईं। सूत्रों के मुताबिक, इलाज के चलते नुसरत को बाली में अपना स्टे बढ़ाना पड़ा है। बता दें कि हादसे से करीब एक हफ्ते पहले नुसरत ने सोशल मीडिया पर छुट्टियों की कुछ तस्वीरें शेयर की थीं। टाइगर श्रॉफ की फिल्म में एंट्री नुसरत के टाइगर श्रॉफ की अगली फिल्म की कास्ट में शामिल होने की भी खबर है। यह टाइगर और नुसरत की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी होगी। एक सूत्र ने पिंकविला को बताया, “टीम को ऐसी एक्ट्रेस चाहिए थी, जो कहानी में मजबूती और भावनात्मक गहराई ला सके। नुसरत हमेशा सबसे मजबूत विकल्पों में थीं।” फिल्म में पश्मीना रोशन, अभिषेक बनर्जी और एल्विश यादव भी अहम भूमिकाओं में हैं। शूटिंग के दौरान घायल हुई थीं नुसरत साल 2023 में नुसरत भरूचा के शूटिंग के दौरान घायल होने की दो घटनाएं सामने आई थीं। अप्रैल 2023 में फिल्म ‘अकेली’ की शूटिंग के दौरान भी नुसरत हादसे का शिकार हुई थीं। एक सीन में उन्हें भागते हुए दिखाया जाना था। इसी दौरान वह संगमरमर के फर्श पर सिर के बल गिर गई थीं। हादसे के बाद वह करीब आधे घंटे तक दर्द से रोती रहीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें कुछ दिन आराम करने की सलाह दी थी। वहीं, जनवरी 2023 में फिल्म ‘छोरी 2’ की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन करते समय उनके चेहरे पर चोट लग गई थी। चोट इतनी थी कि उन्हें चेहरे और भौंह के पास टांके लगवाने पड़े थे। इसके बाद उनका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह टांके लगवाती नजर आई थीं। अगस्त 2021 में शूटिंग के दौरान तबीयत बिगड़ी थी इससे पहले अगस्त 2021 में नुसरत की शूटिंग के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। वह लव रंजन की फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। करीब 23-24 दिनों से लगातार काम करने के कारण वह काफी थक गई थीं। घटना वाले दिन उन्हें तेज चक्कर आए और वह ठीक से खड़ी या बात नहीं कर पा रही थीं। इसके बाद उन्हें मुंबई के हिंदुजा अस्पताल ले जाया गया। वहां उनका ब्लड प्रेशर 65/55 तक गिर गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद इसे गंभीर वर्टिगो अटैक बताया था। इसकी वजह ज्यादा तनाव और थकान बताई गई थी। इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। डॉक्टरों ने 15 दिन आराम की सलाह दी थी। उनकी वजह से फिल्म की शूटिंग भी रोक दी गई थी। मौलाना रजवी ने मंदिर जाने पर आपत्ति जताई थी नुसरत भरूचा पिछले साल उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुंची थीं। उन्होंने महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भी शामिल हुईं। नुसरत ने मंदिर से अपनी तस्वीर भी शेयर की थी और लिखा था, ‘जय श्री महाकाल।’ इसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके मंदिर जाने और हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे शरिया कानून के खिलाफ बताते हुए ‘गुनाह-ए-अजीम’ (बड़ा पाप) कहा था और नुसरत को तौबा (माफी) करने व कलमा पढ़ने की सलाह दी थी। नुसरत मुस्लिम बोहरा परिवार से ताल्लुक रखती हैं। हालांकि, उन्होंने बताया था कि उनका परिवार बचपन से ही सभी धर्मों का सम्मान करता रहा है। नुसरत के मुताबिक, वह मंदिरों के अलावा गुरुद्वारे और चर्च भी जाती रही हैं। उन्होंने वैष्णो देवी और केदारनाथ के दर्शन भी किए हैं। साथ ही वह नमाज भी पढ़ती हैं।
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